शरीर में गांठ क्यों बनती है?

शरीर में गांठ क्यों बनती है?

शरीर में गांठ क्यों बनती है?

आयुर्वेद की नजर से पूरा सच

(A Study by Dr. Prem Shankar Pandey)

आज के समय में शरीर में गांठ बनना बहुत आम हो गया है।
पेट, छाती, हाथ-पैर, गर्दन — और खासकर महिलाओं में PCOD, गर्भाशय की गांठ, ब्रेस्ट लंप

एक सर्वे के अनुसार भारत में हर 5 में से 1 महिला किसी न किसी प्रकार की गांठ से जूझ रही है।

शुरुआत में जब गांठ छोटी होती है, तो हम उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
लेकिन जैसे-जैसे उसका आकार बढ़ता है, मन में सवाल उठने लगते हैं:

  • ये गांठ आई कहाँ से?
  • मुझे ही क्यों हुई?

आइए इसे आयुर्वेद के नजरिये से समझते हैं।


आयुर्वेद में गांठ को क्या कहते हैं?

आयुर्वेद में शरीर में बनने वाली हर प्रकार की गांठ, सिस्ट या रसौली को
“गुल्म” कहा गया है।

गुल्म का अर्थ है —
ऐसी ठोस संरचना जो शरीर में वायु दोष के बिगड़ने से बनती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लंबे समय तक जीवनशैली में असंतुलन और गलत दैनिक आदतों के कारण कई गैर-संचारी रोग विकसित होते हैं।


गांठ बनती कैसे है? (सरल उदाहरण से समझिए)

आपने कभी साबुन के झाग देखे हैं —
बाहर पतली परत और अंदर हवा भरी रहती है।

या गर्मियों में खेतों की मिट्टी —
पानी सूखते ही गोल-गोल ढेले बन जाते हैं।

कुछ ऐसा ही शरीर के अंदर होता है।

जब शरीर में रूखापन (Dryness) बढ़ता है,
तो वायु दोष बिगड़ता है
और यही बिगड़ी हुई वायु धीरे-धीरे गांठ का रूप ले लेती है।


गांठ बनने के मुख्य कारण

(आचार्य चरक के अनुसार)

1. प्राकृतिक वेगों को रोकना

जैसे:

  • पेशाब रोकना
  • मल रोकना
  • गैस रोकना
  • भूख रोकना
  • प्यास रोकना

आज की बिज़ी लाइफस्टाइल में लोग मीटिंग, ट्रैवल और काम के दबाव में
शरीर के प्राकृतिक संकेतों को दबाते रहते हैं।

इससे मल शरीर में जमा होता है
और वही आगे चलकर गांठ बन जाता है।


2. भूख में पानी पीना

तेज़ भूख लगने पर पानी पी लेने से
पाचन अग्नि मंद हो जाती है।

अग्नि कमजोर → वायु बिगड़ी → गांठ की शुरुआत।


3. जरूरत से ज्यादा रूखापन

आज “Zero oil”, “No ghee”, “Fat-free life” को हेल्थ मान लिया गया है।

जो लोग:

  • तेल नहीं लगाते
  • घी नहीं खाते
  • AC में ज्यादा रहते हैं
  • बहुत अधिक ट्रैवल करते हैं

उनके शरीर में अत्यधिक ड्राइनेस पैदा हो जाती है।

यही ड्राइनेस आगे चलकर
PCOD, फाइब्रॉइड, कैंसर जैसी गांठों की जमीन बनाती है।


Mindshift में गांठ का इलाज कैसे किया जाता है?

1. निदान परिमर्जन — कारण हटाओ

  • वेग कभी न रोकें
  • रोज़ तेल मालिश करें
  • भोजन में घी अवश्य लें

👉 कारण हटेगा, तभी इलाज टिकेगा।


2. बिगड़ी हुई वायु को ठीक करना

आयुर्वेद के अनुसार गांठ का मुख्य कारण वायु दोष है।

इसके लिए श्रेष्ठ औषधि है हरड़ (Haritaki)

सेवन विधि:

  • ¼ या ½ चम्मच हरड़ पाउडर
  • 1 चम्मच घी के साथ
  • भोजन से पहले

इससे:

  • वायु संतुलित होती है
  • जमा मल बाहर निकलता है
  • टॉक्सिन्स साफ होते हैं

3. नित्य विरेचन — समय-समय पर पेट साफ

पुराने समय में हर 2 महीने में
एरंड तेल (Castor Oil) देने की परंपरा थी।

Mindshift में शंख प्रक्षालन क्रिया नियमित होती है।

लाभ:

  • मल नहीं जमता
  • वायु संतुलित रहती है
  • गांठ बनने की संभावना कम होती है

4. पंचकर्म — विशेषकर बस्ती चिकित्सा

आयुर्वेद में गांठों के लिए सबसे शक्तिशाली इलाज है
बस्ती (Medicated Enema)

यह साधारण एनिमा नहीं होती।
इसमें विशेष तेल और काढ़ों का उपयोग किया जाता है।

बस्ती से:

  • वायु नियंत्रण में रहती है
  • शरीर को गहरा पोषण मिलता है
  • PCOD, फाइब्रॉइड, ब्रेस्ट लंप और कैंसर की गांठों में सहायता मिलती है

5. ऐसा आहार जो गांठ घटाए

  • 3 महीने का व्यक्तिगत डायट प्लान
  • छाछ
  • परवल
  • सहजन

ये सभी गांठ कम करने में सहायक होते हैं।


झूठे वादों से सावधान रहें

इंटरनेट पर कई लोग कहते हैं:

  • “15 दिन में गांठ गायब”
  • “एक नुस्खा सभी गांठ खत्म”

ऐसे दावों से दूर रहें।

👉 गांठ होने पर Mindshift & Holistic Awakening से संपर्क करें
और डॉ. प्रेम शंकर पांडेय से सही मार्गदर्शन लें।


अंतिम बात

चाहे PCOD हो,
फाइब्रॉइड हो,
ब्रेस्ट लंप हो,
या कैंसर की गांठ —

सही आयुर्वेदिक चिकित्सा + सही दिनचर्या
इन सभी में सहायक होती है।

समय रहते:

  • कारण हटाइए
  • वायु ठीक कीजिए
  • शरीर को ड्राइनेस से बचाइए

तभी आप गांठ से भी बचेंगे
और बड़ी बीमारी से भी।

🌿 @Mindshift & Holistic Awakening

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *